कार्यक्रम में डॉ. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में पुस्तक का विमोचन किया गया। मंच पर उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक की विषयवस्तु और उसके सामाजिक संदेश की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि ‘प्राकृतिक सजा’ केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने वाला एक विचार है। पुस्तक में सामाजिक मूल्यों, नैतिकता और संवैधानिक चेतना से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
लेखक संजय सिंह राजपूत, जो छत्तीसगढ़ स्वराज सेना के राष्ट्रीय संयोजक/संस्थापक के रूप में भी जाने जाते हैं, ने अपने संबोधन में बताया कि इस पुस्तक का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को संविधान और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है, और यह पुस्तक उसी दिशा में एक प्रयास है।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साहित्यकारों और कवियों ने भी अपने विचार साझा किए तथा पुस्तक को समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं और महिलाओं के लिए उपयोगी बताया। विमोचन समारोह के अंत में लेखक को शुभकामनाएं दी गईं और पाठकों से पुस्तक पढ़ने का आग्रह किया गया।‘प्राकृतिक सजा’ के विमोचन ने बिलासपुर और रायपुर के साहित्यिक परिदृश्य में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। यह पुस्तक न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए, बल्कि सामाजिक सरोकार रखने वाले हर व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हो सकती है।
