कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने निषाद समाज की परंपरागत आजीविका, जल से जुड़ी पहचान और वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक भागीदारी को लेकर चर्चा की। “अब सिर्फ नाव नहीं चलेगी, अब नीति भी चलेगी” तथा “संगठन ही शक्ति है” जैसे नारों के साथ समाज की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया गया। आयोजन में युवाओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही और सामाजिक नेतृत्व में उनकी भूमिका पर भी जोर दिया गया।
संजय सिंह राजपूत ने कार्यक्रम में शामिल होकर कहा कि निषाद समाज तेजी से संगठित हो रहा है और अपने अधिकारों तथा प्रतिनिधित्व के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। उन्होंने सामूहिक भागीदारी को भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण बताया। आयोजन में स्थानीय नागरिकों, सामाजिक प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम को निषाद समाज की एकजुटता, पहचान और सामाजिक संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।


