संजय सिंह राजपूत के अनुसार, संविधान केवल कानून की किताब नहीं, बल्कि देश के मूल्यों, अधिकारों और कर्तव्यों का मार्गदर्शक दस्तावेज है। उनका मानना है कि यदि युवा वर्ग संविधान की मूल भावना को समझेगा, तो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी अधिक सार्थक और जागरूक होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में नीति, अधिकार और विधायी प्रक्रियाओं पर चर्चा बढ़ी है, ऐसे में संविधान का अध्ययन नागरिकों को तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाने में मदद करता है।उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे समय निकालकर संविधान के प्रमुख अनुच्छेदों, मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों का अध्ययन करें तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाएँ।